उत्तराखंड में स्थित 10 ऐसे हिल स्टेशन जहाँ घूमने आते है सबसे ज्यादा पर्यटक

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उत्तराखंड उत्तर-भारत में स्थित एक खुबसुरत और एक शांत राज्य के रुप में विद्यमान है ,इस जगह का शुमार देश के उन चुनिंदा जगह मे  है जो अपनी सुंदरता के चलते दुनिया भर के सैलानियों को अपनी और आकर्षित करता है | कुछ ऐसे ही 10 हिल स्टेशन है जहाँ साल भर लाखों में  पर्यटक घूमने आते रहते है | 

नैनीताल

नैनीताल उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक हैं और, उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों में सबसे ज्यादा पर्यटक यही आते हैं | यहाँ का ठंडा मौसम और इस स्थान की  प्राकृतिक सुंदरता लोगो को इतना आकर्षित करती है कि हर साल यहाँ पर लाखों पर्यटक आते है | यहाँ स्थित नैना झील पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है | नैनीताल नाम ही इस अविरल झील पर आधारित है, जिसके पार शहर स्थित है। यह नैनीताल में सभी गतिविधियों का केंद्र है। 

नैना पीक – यहाँ नैना पीक कुमाऊ क्षेत्र का सबसे अधिक देखा जाने वाला पिकनिक स्थल।  इसमें ग्रेट हिमालय, नैनी झील का एक बेजोड़ दृश्य है, नंदा देवी पर्वत और तिब्बत सीमा का विशाल दृश्य भी है। यह नैनीताल के मुख्य शहर के लिए 5 किमी ट्रेक है।

स्नो व्यू प्वाइंट- स्नो व्यू प्वाइंट देखे बिना कोई भी नैनीताल की अपनी यात्रा पूरी नहीं कर सकता है। यह स्थान 2,260 ऊंचाई पर स्थित है और यह नैनीताल के मुख्य शहर की तुलना में अधिक ठंडा है।  यह बर्फ से ढकी चोटियों और पहाड़ों का एक उत्कृष्ट दृश्य प्रदान करता है। यह फ़ोटोग्राफ़ी के लिए भी सबसे अच्छी जगह है। 

एक यूरोपीय व्यापारी और शिकारी ने इस जगह की खोज 1841 में नैनीताल में की थी । उन्होंने नैनीताल की सुंदरता के बारे में लिखा है कि “यह अब तक की सबसे अच्छी साइट है जिसे मैंने हिमालय में 1,500 मील ट्रेक के दौरान देखा है”।

ब्रिटिश सत्तारुढ़ के दौरान नैनीताल शासकों का पसंदीदा गंतव्य था और वे विश्राम और जल-पान के लिए नैनीताल आते थे। नैनीताल उत्तराखण्ड के कई अन्य स्थलों में से एक है जो पर्यटकों को आराम देता है।  इसे उत्तर भारत के लिए हनीमून डेस्टिनेशन भी माना जाता है। 

निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जो नैनीताल से 71 किमी दूर है | यहाँ से निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो नैनीताल से 36 किमी की दूरी पर है |  

दिल्ली से लगभग 320 किमी दूर और उत्तराखंड और भारत के बड़े शहरों के लिए नियमित बस सेवाओं द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है | 

यहाँ गर्मियों व सर्दियो, दोनों ही मौसम में यहाँ सैलानी आते है | 

मसूरी

पहाड़ों की रानी मसूरी अपने शांत और ठंडे वातावरण के लिए जाना जाता है | मसूरी में कई ऐसे पर्यटक स्थल है जिन्हे देखने के लिए हर साल लाखों में पर्यटक आते है | “पहाड़ों की रानी” के नाम से और उत्तर भारत के हनीमून और गर्मियों की छुट्टी मनाने की जगह  के रूप में प्रसिद्ध है। केम्प्टी फॉल, रोपवे टू गन हिल और म्युनिसिपल गार्डन नामक एक खूबसूरत फॉल ने मसूरी की सुंदरता और आगंतुकों के लिए बड़ा आकर्षण बनता है।  मसूरी बर्फ से ढके पहाड़ों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। एक किनारे पर पवित्र नदी गंगा और दूसरे छोर पर यमुना नदी को देख सकते हैं। इन सबके अलावा जॉर्ज एवरेस्ट और जॉर्ज एवरेस्ट हिल स्थान भी लोगो को सबसे ज्यादा आकर्षित करते है |

मसूरी पहुंचने के लिए सबसे पहले देहरादून पहुँचना होता है | निकटतम हवाई अड्डा जॉलीग्रांट है, जो मसूरी से 60 किमी दूर है | यहाँ से निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून, है जो मसूरी से 35  किमी कि दूरी पर है | 

धनौल्टी

धनौल्टी भी उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट जगहों में से एक है | यहाँ पर गर्मियों के महीनों में भी मौसम काफी ठंडा बना रहता है |इसी सुहावने और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को यह जगह ज्यादा अच्छी लगती है | धनौल्टी में लोग एडवेंचर स्पोर्ट्स और कैंपिंग के भी आनंद लेते है |देवदार, ओक्स और रोडोडेंड्रोन (बुरांश ) के घने जंगलों के बीच स्थित, यह एक आदर्श स्थान है जो मन और आत्मा की पूर्ण शांति सुनिश्चित करता है। हरी घास के मैदान, विशाल वृक्ष, हिमालय की चोटियों के लुभावने दृश्य, धनोल्टी को पर्यटकों के लिए एक आकर्षक जगह बनाते हैं। धनोल्टी बर्फ से ढके वाले हिमालय में कई ट्रेक के लिए आधार बिंदु है, विशेष रूप से गढ़वाल के टिहरी क्षेत्र में।  सबसे लोकप्रिय ट्रेक घने अल्पाइन जंगलों के माध्यम से हैं जो आपको सुरकंडा देवी, चंद्रबदनी और कुंजापुरी तक ले जाते हैं, पवित्र देवी दर्शन त्रिकोण के पवित्र तीन शक्ति-पीठ हैं। धनोल्टी जाने के लिए सबसे अच्छा समय मार्च और जून के बीच है।

 देहरादून से धनौल्टी लगभग 65 किमी दूर है, जो मसूरी से सिर्फ 25 किमी की दूरी पर है |

अल्मोड़ा

अल्मोड़ा शहर को अंग्रेजों ने पर्यटक क्षेत्र के रूप में विकसित किया था | यह एक पहाड़ी पर बसा हुआ बहुत ही खूबसूरत व बेहतरीन पर्यटक स्थल है । इसे कुमाऊँ की सांस्कृतिक नगरी  के नाम से भी जाना जाता है | इस शहर के आस – पास कई सारे धार्मिक स्थल है जो पूरे देश में प्रसिद्ध है । जैसे कि जागेश्वर धाम , कटारमल का सूर्य-मंदिर, नंदा देवी मंदिर, कसारदेवी मंदिर और  चितई में गोलू देव मंदिर यहाँ के प्रमुख धार्मिक स्थल है । अल्मोड़ा विभिन्न लड़ाई और राजवंशों का गवाह भी है। इसके निशान अल्मोड़ा जिले में आसानी से देखे जा सकते हैं। चंद राजवंश के राजा बाल कल्याण ने 1563 में इस सुंदर स्थान की स्थापना की और स्वामी विवेकानंद, पहले हिंदू संत जिन्होंने दूसरे धर्म में भी बड़े पैमाने पर लोकप्रियता प्राप्त की और संयुक्त राज्य अमेरिका में भारी ध्यान दिया, ने अल्मोड़ा के पास एक गुफा में आत्मज्ञान  प्राप्त किया था।

अल्मोड़ा आने के लिए आपको सबसे पहले हल्द्वानी आना होता जहाँ से आप बस या टैक्सी में सफर कर सकते है और यहां की दूरी 95 km है । निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है | 

कौसानी

कौसानी आकर्षक दृश्यों के साथ एक मनोरम हिल स्टेशन है, जो बागेश्वर जिले में 1890 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ से त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली पर्वतों की श्रृंखला एक साथ दिखाई देती है । कौसानी देवदार के पेड़ो के जंगल के बीच में स्थित है जिससे आकर्षक वातावरण का आनंद मिलता है। महात्मा गांधी को कौसानी के नाम से जाना जाता है, गाँधीजी  को कौसानी इतना पसंद आया था की उन्होने इसे भारत का स्विट्ज़रलैंड के नाम का दर्जा दिया था | अनासक्ति आश्रम वह स्थान है जहां महात्मा गांधी ने 1929 में अपने जीवन के अनुभवों को लिखने में दो सप्ताह बिताए थे। अनासक्ति आश्रम को गांधी आश्रम भी कहा जाता है।  यहां एक छोटा संग्रहालय है जो महात्मा गांधी को समर्पित है। संग्रहालय तस्वीरों और शब्दों के माध्यम से गांधी की जीवन की कहानियां सुनाता है। उनके चरखे और अन्य निजी वस्तुओं को यहां रखा गया है।  यहाँ एक छोटा पुस्तकालय भी है जहाँ गाँधीवादी दर्शन पर किताबें मिल सकती हैं।

कौसानी अपनी प्राकृतिक खुबसुरती और ठंडे मौसम, चाय के छोटे – छोटे बागानों के लिए विश्व प्रसिद्ध है । यह शहर के भीड़- भाड़ से मुक्त एक शांत स्थान है । इसके 15km दूरी पर बैजनाथ धाम स्थित है जो शिव-पार्वती का पावन मंदिर है | 

यह  मंदिर एक विशेष धार्मिक महत्व रखता हैं, और भगवान शिव, पार्वती, चंडिका, गणेश, कुबेर, और सूर्य को समर्पित मूर्तियां हैं।

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औली

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है, औली काफी ठंडा व खूबसूरत  स्थान है | यहाँ होने वाले विंटर स्पोर्ट्स के लिए यह सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, यहाँ पर सर्दियों में स्कीइंग और अलग अलग विंटर स्पोर्ट्स का आयोजन होता है | 

उत्तराखंड में औली, नौसिखिया और अनुभवी स्कीयर के लिए स्कीइंग के लिए भारत में सबसे प्रसिद्ध जगह है।  उत्तराखंड ने कई विश्व स्तरीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं और इसके परिणाम से खुश होकर उत्तराखंड सरकार ने नियमित आधार पर इस तरह के आयोजन करने का निर्णय लिया है।  सर्दियों के मौसम में विश्व स्तरीय स्कीयर उत्तराखंड के औली में एकत्र होते है   

 ग्रेट हिमालयन रेंज में उच्च ऊंचाई वाली स्कीइंग अग्रिम उपकरणों और पेशेवर गाइडों के साथ बहुत व्यवस्थित है।  यह पर्यटकों की जेब में थोड़ा भारी हो सकता है क्योंकि निवेश की भारी आवश्यकता के कारण हाई एल्टीट्यूड स्कीइंग में कोई आयोजक नहीं हैं लेकिन ग्रेट हिमालय की बेजोड़ ढलान पर स्कीइंग करना निश्चित रूप से जीवन में एक बेजोड़ अनुभव होगा।

अगर आप आग के सामने बैठने के बजाय या बंद कमरे में एक कप कॉफी से दूर अपने सर्दियों के समय का आनंद लेना चाहते हैं।  निश्चित रूप से, भारत की महान हिमालय पर्वतमाला गहने जरूर आये ।

स्कीइंग एक ऐसा साहसिक खेल है जिसने दुनिया भर में अपार लोकप्रियता हासिल की।

इन सबके अलावा औली के आस-पास जोशीमठ, फूलों की घाटी,  बद्रीनाथ व माणा भी अपने धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते लेकिन अधिक ऊंचाई में होने के कारण बद्रीनाथ व माणा सर्दियों में बंद रहते है | 

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मुनस्यारी

मुनस्यारी शहर उत्तराखंड में लगभग 2200 मीटर की ऊंचाई पर द ग्रेट हिमालयन रेंज के जड़ो पर स्थित है | मुनस्यारी में गर्मियों व सर्दियों में पर्यटक काफी आते है, सर्दियो में जब यहाँ बर्फ गिरती है तब यहाँ सबसे ज्यादा लोग घूमने आते है । यह मसूरी, शिमला जैसा चर्चित तो नहीं है, लेकिन अपनी खूबसूरती में सबसे अलग है | पहाड़ियों के नीचे की ओर घाटी में फैले पहाड़ों की एकता को दर्शाता है।

सबसे रमणीय झरना,बिर्थी फॉल्स, जो 125 मीटर की ऊंचाई पर है । झरने के करीब जाने के इच्छुक पर्यटकों के लिए एक पैदल मार्ग भी बनाया गया है। मुनस्यारी में सबसे ऊँचे स्थान पर जाना जाने वाला खलिया शीर्ष 3500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है जहाँ से पंचचूली, नंदा देवी, हरदौल, राजरंभा और मिलम घाटी सहित हिम-हिमालय की चोटियों के शानदार दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। खलिया टॉप का ट्रेक बालटी बैंड से शुरू होता है जो मुनस्यारी शहर से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।  

इस ट्रेक को करने वाले अधिकांश ट्रेकर्स खलिया टॉप पहुंचने के बाद वापस लौट जाते हैं। हालाँकि, यहाँ एक और बिंदु है जिसका नाम ज़ीरो पॉइंट है जो उसी ट्रेक पर ऊपर है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह लगभग 4000 मीटर की ऊँचाई पर है जहाँ से 360 डिग्री हिमालयी दृश्य का आनंद लिया जा सकता है, जो खलिया टॉप से ​​संभव नहीं है। मुनस्यारी काठगोदाम से लगभग  290 की दूरी पर है |

लैंसडौन

लैंसडौन उत्तराखंड का सबसे साफ-सुथरा और ठंडा हिल स्टेशन माना जाता  है । लैंसडाउन एक पहाड़ी पर 1,706 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जिसे मूल रूप से स्थानीय भाषा में ‘कालुदंड’ के रूप में जाना जाता था | यह स्थान छुट्टियाँ बिताने के लिए काफी अच्छा है । यहाँ झील में बोटिंग की भी सुविधा है । इसके अलावा यहाँ के टिप इन टॉप से सुन्दर हिमालय के पहाड़ दिखाई देते है | लैंसडाउन ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश गढ़वाल से स्वतंत्रता सेनानियों की गतिविधियों का एक प्रमुख स्थान था। आजकल, भारतीय सेना के प्रसिद्ध गढ़वाल रायफ़ल्स का यहां कमांड ऑफ़िस था। निकटतम रेलवे स्टेशन 41 किमी की दूरी पर कोटद्वार है। 

भीमताल

भीमताल आपको एक अद्भुत अनुभव के लिए और कई साहसिक गतिविधियाँ प्रदान करता है। भीमताल झील एक शानदार नज़ारा है और चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इस स्थान को और भी खूबसूरत बनाता है | कुमाऊँ क्षेत्र में  जिसे भारत के झीलों के जिले के रूप में भी जाना जाता है | भीमताल झील सबसे बड़ी झील है और कस्बे को पीने के पानी की आपूर्ति करती है और इस क्षेत्र में जलीय कृषि का समर्थन करती है। भीमताल नैनीताल से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर है और 1350 मीटर की सामान्य ऊंचाई पर स्थित है।  भीमताल में नौका विहार कुमाऊँ की यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण है। झील के बीच में, एक सुंदर द्वीप है जिसमें एक रेस्त्रां है। यह द्वीप झील के मनोरम दृश्य के साथ-साथ इसके शानदार परिवेश प्रदान करता है नीचे आये बादलों और यहां आपको कंपनी देने के लिए बत्तख के साथ शांतिपूर्ण शुरुआती सुबह का आनंद लें सकते है | भीमताल झील घने जंगलों से घिरी हुई है और झील के आसपास कई ट्रेकिंग ट्रेल्स भी  हैं। दूर से सुरम्य घाटियों और शांत झील का दृश्य ट्रैकिंग के लायक है। भीमताल झील से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर नौकुचियाताल है, जहाँ पर रोमांचकारी नजारे मिलते है और यहाँ के विहंग दृश्य को देखने के लिए पैराग्लाइडिंग कर सकते हैं ।

 रानीखेत

रानीखेत उत्तराखंड में आकर्षक जगहों में से एक है जो अल्मोड़ा जिले में  स्थित है। रानीखेत का शाब्दिक अर्थ है – रानी की भूमि (क्वींस लैंड), प्राकृतिक सुंदरता के प्रशंसकों के लिए एक सभी मौसम पर्यटन स्थल है। देवदार के पेड़, हरे भरे जंगल, नाज़ुक पौधों का जीवन और आकर्षक जंगली जीवन के आकर्षक और राज सी दृश्य सुगंधित पहाड़ की हवा, ताजा और शुद्ध, पक्षियों का गायन, हिमालय के दृश्य का मनोरम दृश्य, ये सभी रानीखेत के स्वर्गीय और शुद्ध वातावरण को जोड़ता है। रानीखेत में हिमालय की पर्वत-माला का शानदार दृश्य दिखाई देता है। त्रिशूल, नंदा देवी, नंदा खुट और कुछ चोटियाँ हैं जो स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं और वे भोर में काफी मन मोहक दिखाई देती हैं। एक सुखद पहाड़ी ठंड के साथ, गोल्फ कोर्स रोड के नीचे सुबह की सैर उतनी ही रोमांटिक है जितना कि मिल सकती है।

रानीखेत से लगभग 10 किमी दूर स्थित चौबटिया है। इस स्थान पर खुबानी, आड़ू, चेस्टनट और बादाम के बागान हैं और सेब के बागों के लिए प्रसिद्ध है। हिमालयी वनस्पतियों की एक विस्तृत विविधता के साथ, यह हिमाच्छादित हिमालय के मनोरम दृश्य भी प्रस्तुत करता है। फूलों के अलावा, बाहर के रास्ते पर बगीचे की दुकान से ताज़ा जूस और शुद्ध शहद ख़रीद सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन 68 किमी की दूरी पर काठगोदाम है । 

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